September 28, 2022
Bolshevik Kranti Kab Hui

बोल्शेविक क्रांति कब हुई ? | Bolshevik Kranti Kab Hui

Bolshevik Kranti Kab Hui :- विश्व के इतिहास में बहुत सारी सामाजिक और राजनीतिक क्रांतियां हुई है। आज के इस लेख में हम एक ऐसी राजनीतिक क्रांति की बात करने वाले हैं जो अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक क्रांति मानी जाती है। हमारे इस लेख का विषय है – Bolshevik Kranti Kab Hui.


बोल्शेविक क्रांति क्या थी ? OR Bolshevik Kranti Kab Hui

बोल्शेविक क्रांति 1917 में हुई थी। इस क्रांति में रूस के मजदूर वर्ग के लोगों और किसानों ने जार निकोलस की सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था। बोल्शेविक क्रांति को ही रूसी क्रांति और अक्टुबर क्रांति के नाम से जाना जाता है।

यह क्रांति राजनीति मे हुई क्रांतियों में बहुत बड़ी थी। बोल्शेविक क्रांति को विश्व की पहली समाजवादी क्रांति के रूप मे मान्यता दी गई है। रूसी क्रांति के समय का ही वह समय था जब मार्क्स ने अपने समाजवाद की विचारधारा को दुनिया के सामने रखा था।

रूसी क्रांति की वजह से जार निकोलस का स्वेच्छाकारी, एकतंत्री और तानाशाही शासन समाप्त हुआ था। एक तरफ जहां बोलशेविक क्रांति की वजह से पूंजीपतियों, सामंतों और जमीदारों का भी अंत हुआ, वहीं दूसरी तरफ मजदूरों और किसानों की सत्ता स्थापित हुई। मजदूर और किसान किसी के लिए नहीं अपितु अपने लिए ही कार्य करते थे।


बोल्शेविक क्रांति का अर्थ

रूसी भाषा में बोल्शेविक शब्द का अर्थ होता है बहुसंख्यक या बहुमत अर्थात बहुत अधिक संख्या में।

रूस में एक सामाजिक डेमोक्रेटिक मजदूर पार्टी थी। यह पार्टी टूटने के बाद दो भागों में बंट गई। बोल्शेविक, उसी का टूटा हुआ एक भाग था। इसमें पार्टी सदस्यों की संख्या बहुत अधिक थी।


बोल्शेविक क्रांति का इतिहास

रूस में किसानों के गुलामी के विरुद्ध चलाए गए एक युद्ध में जब हार हुई तो उसके बाद पूंजीवाद और औद्योगिकीकरण की शुरुआत हुई और वह धीरे-धीरे सुदृढ़ होने लगा। रूस इस सदी के अंत तक एक ताकतवर साम्राज्यवाद के रूप में विश्व के सामने आया।

जार निकोलस के तानाशाही और स्वेच्छाचारी शासन में जनता को कोई भी अधिकार नहीं दिए गए थे और ना ही जनता को राजनीतिक स्वतंत्रता थी, परंतु उस वक्त धीरे-धीरे मार्क्सवाद अपने पैर फैला रहा था। कुछ लोकतंत्रवादी समूह समाजवाद की तरफ बढ़ रहे थे।

इस समय रूस में सामाजिक असमानता एक बड़े पैमाने पर फैली हुई थी। समाज को 3 वर्गों में बांट दिया गया था। जिनमें सबसे पहले उच्च वर्ग आता था। इस वर्ग को राज्य के लगभग सभी अधिकार प्राप्त थे। दूसरे वर्ग में जमीदार, पूंजीपति और व्यापारी आदि आते थे और तीसरे वर्ग में मजदूर किसान और अन्य निचले वर्ग के लोग शामिल थे।

सन 1958 में रूस में एक डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी बनी थी, जिसका 1903 में बोल्शेविक और मैनशेविक दो अलग-अलग पार्टी में विभाजन हो गया, क्योंकि उनकी विचारधारा में कुछ फर्क था। बोल्शेविक चाहते थे कि समाजवादी क्रांति का नेतृत्व किसान और श्रमिक करें जबकि मैनशेविक चाहते थे कि इस क्रांति का नेतृत्व पूंजीवादी करें।

सन 1917 मे लेनिन इस क्रांति का नेतृत्व करने वाले बन चुके थे। इसी वर्ष जार निकोलस का शासन समाप्त किया और मैनशेविक पूंजीवाद के समर्थन से सरकार का हिस्सा बन गई।

इसके बाद अक्टूबर में, बोल्शेविक पार्टी के द्वारा किए गए 3 दिन के कड़े संघर्ष से, अस्थाई सरकार ने समर्पण किया। क्योंकि यह क्रांति अक्टूबर के महीने में सफल हुई तो इसे अक्टूबर क्रांति के नाम से भी जाना जाता है।


बोल्शेविक क्रांति कहां हुई थी ?

बोल्शेविक क्रांति की शुरुआत रूस में हुई थी। रूसी क्रांति दो भागों में हुई। पहली बार यह क्रांति मार्च 1917 में हुई और दूसरी बार 19 अक्टूबर 1917 में। अक्टूबर के अंत में इस क्रांति को विजय प्राप्त हुई।


बोल्शेविक क्रांति के मुख्य कारण

रूसी क्रांति होने के कुछ कारण रहे, जो निम्न प्रकार से है:-

  • रूस में सामाजिक रुप से विषमता थी। यहां पर समाज को 3 वर्गों में बांटा गया था। उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग। जिसमें से केवल उच्च वर्ग के लोगों को ही सभी अधिकार दिए गए थे और निम्न वर्ग के लोगों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई थी।
  • इस समय रूस में जार निकोलस का तानाशाही और स्वेच्छाचारी शासन था, जिसमें जनता को किसी भी तरह क अधिकार नहीं दिए गए थे। यह इस क्रांति का मुख्य कारण बना।
  • रूसी क्रांति होने की वजह प्रथम विश्वयुद्ध भी था। साम्राज्यवादी नीति के चलते भी रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ, इसकी वजह से लोग असंतुष्ट थे।
  • 1905 में रूस और जापान के बीच युद्ध हुआ था जिसमें जापान रूस के कुछ हिस्सों पर अधिकार कर लिया था। रूसी क्रांति होने के पीछे यह भी एक कारण रहा।
  • प्रथम विश्वयुद्ध में बड़ी संख्या में लोगों को भर्ती किया गया था, परंतु उन्हें सही समय पर वेतन नहीं दिया गया, जिसकी वजह से भोजन की कमी हुई और वह भी क्रांति का कारण बनी।
  • उस समय रूस में मजदूर लोगों की और किसानों की संख्या अधिक थी परंतु फिर भी उनकी स्थिति बहुत ही दयनीय थी यहां भी रूसी क्रांति का एक कारण बना।
  • समाजवादी विचारधारा की लहर भी बोल्शेविक क्रांति होने की वजह बनी।

बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व कर्ता

बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन के द्वारा किया गया। लेनिन के नेतृत्व की, जार निकोलस की तानाशाही, निर्गुणता और स्वेच्छाचारी शासन से मुक्त करवाने में अहम भूमिका रही। लेनिन के नेतृत्व में ही पूंजीवाद शासन की समाप्ति हुई और समाजवाद की स्थापना हो पाई।


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निष्कर्ष :

आज के इस लेख में हमने जाना, कि Bolshevik Kranti Kab Hui. इसके अलावा हमने इस लेख के माध्यम से आपको बोल्शेविक क्रांति से संबंधित अनेक जानकारी दी है।

आशा करते हैं, कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। यदि इस आर्टिकल से संबंधित आप हमसे कोई भी प्रश्न पूछना चाहते हैं तो हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं।


FAQ’s :

Q1. बोल्शेविक क्रांति कब हुई ?

Ans. सन 1917 में

Q2. बोल्शेविक क्रांति का नेता कौन था ?

Ans.  व्लादीमीर लेनिन

Q3. बोल्शेविक क्रांति कहां हुई थी ?

Ans.  रूस में

Q4. बोल्शेविक शब्द का क्या अर्थ है ?

Ans.  बहुसंख्यक या बहुमत

Q5. बोल्शेविक क्रांति क्यों हुई ?

Ans.  जार निकोलस के तानाशाही और स्वेच्छाकारी शासन में किसानों और मजदूर वर्ग के लोगों की दयनीय स्थिति 
के विरोध में बोल्शेविक क्रांति हुई थी।

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